Zidd

We, humans, have this beautiful character, to express our dissatisfaction or annoyance on almost anything and everything and we go by the word COMPLAINT. We even complain about the things we ourselves do.. like getting up late, doing a job which is different from our liking, eating unhealthy. So, Ruhi came across this old FBContinue reading “Zidd”

व्यथा

अमित गुप्ता द्वारा दिहाड़ी मज़दूरों की व्यथा पर लिखित कुछ पंक्तियाँ …. जान तेरी बड़ी ही सस्ती है,जहाँ पैदा हुआ वो गरीबों की बस्ती है |घर जाने को ना बची कोई कश्ती है, रहने को मिल जाए ठिकाना ऐसी ना तू हस्ती है | कभी कभी कारख़ानों में नज़र घुमाता हूँ, मजदूर मैं उ.प्र. बिहार का ही पाताContinue reading “व्यथा”