लेखनी

कागज और कलम की, कितनी प्यारी दोस्ती है,
कभी भी अलग न होने वाली कितनी प्यारी कहानी है ।
इतना प्यारा रिश्ता, इतना प्यारा दोस्ताना
न कभी था, न कभी होगा ।

प्रिय को प्रेम पत्र हो, या कोई और खबर
दुखद समाचार हो या, सुखद हो खबर,
ये कितनी आसानी से लिख देती है ।

ह्रदय में उठ रही तंरगो को ,
दिल की धड़कन की कहानी को,
दिल में उठ रहे तूफान को,
कागज पर आसानी से उतार देती हैं ।
जो न कह सके लब कभी, ये आसानी से कह देती हैं ।

कहानी हो ,या हो कवि की कविता,
पिता का प्यार हो या माँ की ममता,
ये तो बस अपने ही प्रवाह में
सबको समेट लेती है ।

सीमा पर वीर जवानों के मन में,
दूना जोश भर देती है, जब
इसके शब्द बोलते हैं, और
वहां सैनिक लडते है ।

ये है लेखनी, ताकत है लेखनी
ऐसी इसकी करनी, बहुत कुछ कहती है लेखनी ।।

– सौ. कुमुदिनी शाह

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