सीधी लकीर

अस्पताल का आय सी यू का कमरा ।इतना सन्नाटा कि सूई गिरने की आवाज भी सुनाई दे और बस पलंग पर लेटे हुआ कैंसर का मरीज शिव।हा ये शिव ही है जिस की काया पिछले छः माह में आधी रह गयी है, केवल चेहरा ही पहचान में आता है वरना शरीर पर तो कुछ बचा ही नहीं ।पास में बैठी है पत्नि गिरिजा ।जो रात दिन सेवा में लगी है ।तन मन धन सब कुछ दांव पर लगा दिया है उसने, लेकिन स्वास्थ्य में जरा भी फक॔ नहीं दिखाई दे रहा है ।छः माह से इस अस्पताल में भर्ती है शिव ।सभी प्रकार की चिकित्सा की जा चुकी है ।जब तक स्पेशल कमरा लेकर रहे तब तक तो कभी भी कोई भी आ जा सकताथा शिव के पास, लेकिन अब डाक्टर ने आई सी यू में रख दिया है, मात्र 72 घंटे की जिंदगी बताई।केवल पत्नि ही उनके पास बैठ सकती हैं, बाकी लोग कांच में से देखते रहते है ।हरेक आने वाला व्यक्ति गिरिजा के कंधे पर सांत्वना का हाथ रखकर चला जाता है ।

शिव और गिरिजा का विवाह पांच साल पहले ही हुआ था और वो भी एक संयोग ही था, कि चचा मंगनी पट ब्याह हो गया ।गिरिजा की मौसेरी बहन का विवाह था,पूरा परिवार आया था ।बारात में शिव भी आया था दूल्हे का मित्र।न जाने कैसे शिव का आकर्षण का केंद्र बन गई थी गिरिजा ।उसने गिरिजा के माता पिता से अपनी इच्छा प्रकट की ।कुछ दिन बाद शिव के माता पिता आकर रिश्ता तय कर गये और दो माह में विवाह हो गया ।कुछ समय बाद गिरिजा शिव के साथ दूसरे शहर में रहने आ गई।विवाह में सब लोग उनको शिव पार्वती की जोड़ी ही कह रहे थे ।आरंभिक दिनों में बहुत ही मौज मस्ती रही ।शिव की एक बुरीआदत थी कि रात का खाना वो बिना शराब के नहीं खाता था ।गिरिजा ने बहुत कोशिश की, कि ये आदत छूट जाय लेकिन वो हमेशा यही कह कर टाल देता था कि इस एक बुरी आदत के अलावा कोई बुराई ढूँढ के बता दो।शिव अपने परिवार का पूरा ध्यान रखता था और माता पिता का भी ।गिरिजा के परिवार की भी इज्जत करता ।दोनों सुखद भविष्य के सपने देखने लगे।नन्ही सी बच्ची के मम्मी पापा बन गये।

एक दिन अचानक दोपहर को शिव के सहकर्मी उसको घर लेकर आये और बोले कि उनको चक्कर आ रहे है ।शाम को शिव को लेकर गिरिजा अस्पताल गई।कुछ परीक्षण हुये ।रिपोर्ट से गिरिजा के पैर के नीचे की जमीन खिसक गई ।शिव का लिवर खराब हो गया था और कैंसर की अवस्था पर था ।तुरन्त ही चिकित्सा शुरू हुई ।सब रिश्तेदार आये गये।माता पिता भी आ गए ।गिरिजा की बहन उसकी बेटी को अपने साथ ले गई ।

गिरिजा पूरी तरह से टूट चुकी थी ।पैसा खत्म होने से उधार भी लिया ।अब डाक्टर ने 72घंटे ही बोला है ।शिव कोमा में चलागया ।उसने हृदय की धडकनें केवल मशीन ही बता रही थी ।गिरिजा रात दिन अपलक शिव को देखती रहती ।अब मात्र दो घंटे शेष थे ।गिरिजा शिव के पैरों के पास बैठी थी और उसका भाई बाहर बैठा था ।भाई ने देखा कि गिरिजा सिर टिका के शायद सो गई है ।सुबह नर्स आई,उसने गिरिजा को आवाज दी, वो नहीं उठी, हिलाया तब भी नहीं बोली तो डाक्टर को बुलाया, डाक्टर बोले कि लगभग एक घंटे पहले इनकी जान जा चुकी है ।तभी शिव कीधडकनें बहुत तेज हो गई और मशीन पर आडी तिरछी लकीरें बहुत जल्दी जल्दी आने लगी।डाक्टर भी हैरान थे कि ये क्या हो रहा है, शायद शिव अपनी पार्वती से कुछ कहना चाहता था ।
तभी वो लकीरें अचानक एक सीधी रेखा में आ गई ।और एक सीधी लकीर बन गई, दोनों की जिंदगी ।।।।।

-कुमुदिनी शाह

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