दोस्त

रिमझिम रिमझिम बारिश हो
बालकनी में दोस्तों का साथ हो
गर्म चाय की प्याली हो
गरम पकोड़े का स्वाद हो

हो जाये कुछ हंसी मजाक
न हो किसी का मन उदास
बचपन की यादें साथ हो
बस यही मन आजाद हो

यही है यारों की यारी
सहेज लो धरोहर प्यारी
आये जब साथ निभाने की बारी
न हो किसी का हाथ खाली

– कुमुदिनी शाह

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