हम

आज कोई हिन्दू नही, कोई मुसलमान नही ।
जाति व्यवस्था का मेरे अगल-बगल कोई गुमान नही ।
यू तो बांट दिया समाज को हमने कई हिस्सों मे ।
पर क्यो अब हिस्सों का गुमान नही।

क्यो अब अकेलापन कुछ अच्छा सा लग रहा है ,
हम और तुम असल में है क्या ? ये अब सच्चा सा लग रहा है ।
कहाँ भाग-दौड़ की दुनिया थम सी गई है ।
मेरे पैरों के नीचे की ज़मीन जैसे जम सी गयी है ।

जिसे कहता था कूडा वाला कल, आज वो सफ़ाई वाला बन गया ।
क्या उसका धर्म, क्या उसकी जात, मेरी नज़रों मे एक खास आदमी बन गया ।

कल सड़को पे साथ निकल के भी,
मेट्रो के साथ चलके भी, 
पूल और शेयर मे पास बैठ के भी
,
हम दूर थे ।
आज घरों मे अकेले रह के भी,
हम पास है ।

आज मीडिया मे पाकिस्तान की अगली चाल नहीं ।
पूरा देश एक है, क्या अब भी इस ताकत का एहसास नहीं ।

मैं सोचता हूँ की कल कैसा होगा ?
जब कोरोना वायरस मर जायेगा, तो कल कैसा होगा ?
क्या मा – बाप बच्चों को फिर से डाॅक्टर और इंजीनियर ही बनाएँगे ।
क्या बेटियां बस सरकारी नौकरी के घर बिदाई जाएंगी ।
क्या हम अब प्रकृति…
मैं सोचता हू की कल कैसा होगा ?
जब कोरोना वायरस मर जायेगा, तो कल कैसा होगा ?

– पुष्पेंद्र द्विवेदी

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